कोशी वॉइस डिजिटल न्यूज़ पोर्टल की विशेष जांच में यह तथ्य सामने आया है कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) के स्पष्ट निर्देश पर आगामी 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के पावन अवसर से प्रदेश के सभी थाना क्षेत्रों में 'चाइल्ड हेल्पडेस्क' की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य बाल अपराध, बाल श्रम, बाल तस्करी, यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील मामलों में पीड़ित बच्चों को त्वरित, गोपनीय और संवेदनशील न्याय दिलाना है। एसपी कार्यालय से जारी आदेश में सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि वे हेल्पडेस्क के लिए एक प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी और एक बाल कल्याण अधिकारी की तैनाती सुनिश्चित करें, ताकि बच्चे बिना किसी भय के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ट्रैफिक डीएसपी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, स्कूल-कॉलेजों, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता पोस्टर जारी किए। इन पोस्टरों पर चाइल्ड हेल्पडेस्क का टोल-फ्री नंबर, थाना स्तर पर संपर्क अधिकारी का नाम और बच्चों के अधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां अंकित की गई हैं। ट्रैफिक डीएसपी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पोस्टर केवल कागजी औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों और अभिभावकों के बीच जागरूकता का सेतु बनेंगे, जिससे कोई भी पीड़ित बच्चा चुप न रहे और समय पर न्याय पा सके।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, चाइल्ड हेल्पडेस्क के तहत प्रत्येक थाने में एक अलग कक्ष बनाया जाएगा, जहां बच्चों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, हेल्पडेस्क पर तैनात कर्मियों को बाल मनोविज्ञान, पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और बाल अधिकार संरक्षण कानूनों का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। पुलिस महकमे का मानना है कि इससे बच्चों के मामलों में होने वाली देरी, लापरवाही और दोबारा पीड़ितीकरण की समस्या पर प्रभावी अंकुश लगेगा। गांधी जयंती से शुरू होने वाली यह व्यवस्था न केवल प्रतीकात्मक है, बल्कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक ठोस प्रशासनिक कदम है।
स्थानीय शिक्षाविदों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अब तक बच्चों से जुड़े अपराधों की रिपोर्टिंग में झिझक, सामाजिक भय और कानूनी जानकारी का अभाव मुख्य बाधा था। चाइल्ड हेल्पडेस्क से जहां पीड़ित बच्चों को सुरक्षित माहौल मिलेगा, वहीं अभिभावक भी बिना किसी दबाव के थाने पहुंचकर न्याय की मांग कर सकेंगे। कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया कि हेल्पडेस्क की निगरानी के लिए जिला स्तर पर एक स्वतंत्र समीक्षा समिति बनाई जानी चाहिए, जो हर माह प्रगति रिपोर्ट का आकलन करे।
कोशी वॉइस की इस विशेष रिपोर्ट में यह भी पुष्टि हुई है कि एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को 30 सितंबर तक हेल्पडेस्क की तैयारियां पूरी करने का सख्त निर्देश दिया है। साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि यदि किसी बच्चे के साथ शोषण, उत्पीड़न या अमानवीय व्यवहार की जानकारी मिले तो तत्काल नजदीकी थाने के चाइल्ड हेल्पडेस्क या टोल-फ्री नंबर 1098 पर संपर्क करें। पुलिस प्रशासन का दावा है कि शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और मामले की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी कराई जाएगी। यह पहल बाल सुरक्षा के प्रति प्रशासन की गंभीरता और संवेदनशीलता को दर्शाती है।