नेपाल में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बागमती नदी एक बार फिर उफान पर है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिससे आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ा दी है और संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है, जिससे नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। बागमती नदी का जलग्रहण क्षेत्र काफी विस्तृत है, और ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी तेजी से नीचे की ओर बह रहा है। इससे काठमांडू घाटी और आसपास के जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों और शहरी बस्तियों के निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। कई स्थानों पर अस्थायी रूप से राहत शिविर खोले जा रहे हैं, और नावों तथा बचाव दलों को तैनात किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के पास न जाएं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।
बागमती नदी में आई इस बाढ़ से कृषि क्षेत्र, सड़कों और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। पिछले वर्षों में भी इसी तरह की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी, जिससे प्रशासन इस बार पहले से ही सतर्क है। मौसम विभाग ने लाल अलर्ट जारी किया है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध शहरीकरण के कारण बागमती नदी की बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। नदी के प्राकृतिक बहाव को बाधित करने वाले निर्माण और जलग्रहण क्षेत्र में कटाव इसके प्रमुख कारण हैं। प्रशासन को दीर्घकालिक समाधान के तहत नदी के जलस्तर की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना चाहिए और जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए। फिलहाल, प्रशासन की पूरी मशीनरी तैयार है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।